पंचायत सहायक- गाँव का अफ़सर, ज़ेब का फकीर, सतेन्द्र जी का प्रथम उपन्यास है। प्रथम कृति होते हुए भी इस उपन्यास में सतेन्द्र जी ने नायक के अन्तर्मन में छटपटा रही वेदना, हृदय में चल रहे अन्तर्द्वन्द्व और एक विवश, लाचार, सत्यनिष्ठ और भ्रष्टाचारियों के चक्रव्यूह में फँसे पंचायत सहायक का किरदार बड़ी कुशलता से चित्रित किया है।

डॉ राम बहादुर ‘व्यथित’
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